Reporting the underreported threat of nuclear weapens and efforts by those striving for a nuclear free world.

A project of The Non-Profit International Press Syndicate Group with IDN as flagship agency in partnership with Soka Gakkai International in consultative
status 
with ECOSOC.

 

Trump and Senator Cotton Embrace Enhanced Testing & Face Kilotons of Surprises - Hindi

ट्रंप और सिनेटर कॉटन ने किया अधिक परीक्षण का निर्णय और कर रहे हैं चौतरफा विरोध का सामना

रॉबर्ट केली का दृष्टिकोण

वियना (आईडीएन) – अफवाहों की भरमार है कि अमेरिका निकट भविष्य में एक परमाणु परीक्षण करने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी सिनेट में लाए गए कानून से लगता है कि यह खोखली धमकी नहीं है। हाल के संशोधन में कहा गया है: “आवश्यकता पड़ने पर परमाणु परीक्षण करने के लिए आवश्यक समय को कम करने से संबंधित परियोजनाएँ पूरी करना,” यह धमकी उन राजनैतिक और तकनीकी कठिनाईयों की समझ के पूर्ण अभाव का संकेत है जो ऐसी कार्रवाई से उत्पन्न हो सकती हैं।

परमाणु परीक्षण को तब जरूरी माना जा सकता है जब परमाणु हथियारों के भंडार में किसी समस्या को हल करना हो या किसी नई प्रणाली को विकसित करने की जरूरत हो। वैकल्पिक रूप से, यह विरोधियों को डराने, परमाणु प्रसार को प्रोत्साहित करने और हथियारों की रेस को फिर से गरमाने के इरादे से दी गई राजनैतिक धमकी हो सकती है।

व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) कार्यान्वयन में नहीं है। इस पर अमेरिका ने हस्ताक्षर किए थे लेकिन अंगीकार नहीं किया था। कई अन्य राष्ट्रों ने भी इसे अंगीकार नहीं किया है और यह चिरस्थायी निद्रा में है। लेकिन हथियारों वाले पाँच राष्ट्रों ने 1990 के दशक के मध्य से एक स्वैच्छिक अनौपचारिक परीक्षण प्रतिबंध का पालन किया है और CTBT को वास्तव में लागू करने की बजाय इसी स्थिति में अनिश्चित काल तक बने रहने के लिए तैयार लग रहे हैं।

अन्य चार परमाणु हथियारों से लैस राष्ट्रों ने भी अनौपचारिक निषेध का मोटे तौर पर पालन किया है, और DPRK (उत्तर कोरिया) विश्व का एकमात्र राष्ट्र है जिसने 21वीं सदी में कोई, वास्तव में 6, परमाणु परीक्षण किए हैं।

एक असली परमाणु परीक्षण केवल “परीक्षण” नहीं होता है; यह एक बहुत ही जटिल परमाणु प्रयोग होता है। इसकी लागत लाखों डॉलर होती है, इसकी तैयारी में कई वर्ष लग सकते हैं बशर्ते कि इसका उद्देश्य कोई पूर्णतया राजनैतिक न हो: बड़ा धमाका करना और प्रभुत्व का दावा करना। परमाणु परीक्षण विज्ञान के बहाने से किया जाता है।

यह विशेष रूप से विडंबनापूर्ण है कि ट्रंप प्रशासन को परीक्षण करने में दिलचस्पी है, हालांकि वह वैज्ञानिक परीक्षण का विरोध करता है। यह प्रलेखित है कि अधिक परीक्षण से अधिक समस्याएँ पैदा होती हैं। जटिल परमाणु प्रयोग के लिए सैकड़ों कुशल श्रमिकों और तकनीशियनों तथा सुरक्षा और प्रचार जैसे विभिन्न विभागों के समर्थन की जरूरत पड़ती है।

यदि अमेरिका ऐसा कदम उठाने का निर्णय करता है तो पहले उसे यह तय करना पड़ेगा कि उसे किस चीज का परीक्षण करना है। अमेरिका में दो अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक परमाणु हथियार प्रयोगशालाएँ हैं। उनमें से प्रत्येक पर अमेरिकी परमाणु हथियार भंडार के लगभग आधे हिस्से की जिम्मेदारी है और निश्चित तौर पर उनके “चिरस्थायी भंडार” में से किसी डिवाइस का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। 

उस भंडार में किसी तरह की समस्या नहीं है इसलिए परीक्षण को दोनों प्रयोगशालाओं और अमेरिकी सरकार के हितों को ध्यान में रखना और किसी प्रयोजन का आविष्कार करना होगा। इस तथ्य की अनदेखी करना आसान है कि परमाणु परीक्षण करने सहित परमाणु भंडार की पूरी जिम्मेदारी ऊर्जा विभाग (DOE) के पास है। 

प्रतिरक्षा विभाग (DoD) के संरक्षण में केवल फौजी कार्रवाईयों के लिए आवश्यक हथियार हैं। इन दोनों विभागों और कॉंग्रेस को तय करना होगा कि किस चीज का परीक्षण करना है। DOE के बजाय DoD के बजट में 10 मिलियन डॉलर जोड़ने का सिनेट का निर्णय बुनियादी सरकारी संगठन से अनभिज्ञता दर्शाता है।

अधिकतर चिरस्थायी हथियारों में 150 किलोटन से अधिक ऊर्जा मुक्त करने की क्षमता है। इससे एक नई समस्या खड़ी हो सकती है। अमेरिका थ्रेशहोल्ड परीक्षण प्रतिबंध संधि (TTBT) का एक हिस्सा है जो परीक्षण से उत्पन्न ऊर्जा को 150 किलोटन तक सीमित करती है। 

अमेरिका के भंडार में मौजूद अधिकांश हथियारों का परीक्षण यदि उत्पन्न हो सकने वाली पूरी ऊर्जा पर किया जाता है तो उन्हें 150 किलोटन से अधिक के परीक्षण की जरूरत पड़ेगी। किसी अनौपचारिक समझौते से बाहर निकलने के विपरीत, इसका मतलब किसी अंगीकृत संधि का वास्तविक उल्लंघन होगा।

परीक्षण को दोबारा शुरू करने की तत्परता पहले से ही अमेरिकी प्राथमिकता है। 1993 के PDD-15 के अनुसार DOE के लिए परमाणु परीक्षण करने की क्षमता को कायम रखना आवश्यक है। नेवाडा राष्ट्रीय सुरक्षा स्थल, जिसे पहले नेवाडा परीक्षण स्थल कहा जाता था, को चलाने वाले ठेकेदार को हर वर्ष कई लाख डॉलर दिए जाते हैं। 

मैं 1990 के दशक के अंत में परीक्षण स्थल को चलाने वाली प्रबंधन टीम में था और हमें 24 से 36 महीनों के भीतर परीक्षण कर सकने में सक्षम रहने के लिए अनुबंध दिया गया था। इसमें भौतिक तैयारियाँ शामिल थीं: परमाणु डिवाइस को स्थापित करने और उसका विस्फोट करने में राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की मदद करने के लिए रेगिस्तान में टेस्ट शाफ्ट, उपकरण और जमीन के नीचे रखी गई डिवाइस से जोड़ने के लिए केबल बिछाना, और सभी कल्पनीय समर्थन प्रकार्य करना।

सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक यह सुनिश्चित करना था कि डिवाइस को एक कसकर सील किए गए शाफ्ट में रखकर जमीन में इतनी गहराई में रखा जाए कि कोई विकिरण मुक्त न हो सके। इस प्रौद्योगिकी में विस्तृत अनुभव के बावजूद, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ शून्य निर्गम हासिल करने में सदैव ही सफल नहीं होती थीं। शीत युद्ध की मानसिकता में व्यवसाय करने के खर्च के रूप में इसे स्वीकार किया जाता था लेकिन 2020 के दशक में यह बात स्वीकार्य नहीं होगी।

1970 के बेनबेरी भूमिगत परीक्षण में उसका शाफ्ट फूट गया था जिससे रेडियोधर्मी धूल का एक विशाल बादल मुक्त हुआ था। यह बादल और नेवाडा परीक्षण स्थल से निकले कई अन्य बादल पूर्व की ओर रिपब्लिकन केंद्रों से होकर गुजरे थे। क्या 2020 के दशक में फ्लाई ओवर प्रदेश के मतदाता रेडियोधर्मी राख के लिए गिनी पिग (प्रयोगाधीन व्यक्ति) बनने के लिए उतने ही तैयार होंगे जितने कि वे 1960 और 1970 के दशक में थे?

ट्रंप प्रशासन इस बात को भी ध्यान में रखने में विफल रहा है अमेरिकी ऊर्जा विभाग का लाखों डॉलर की प्रमुख परियोजनाओं को बजट के भीतर और समय पर पूरा करने में असमर्थ रहने का सुस्थापित ट्रैक रिकार्ड है। 

जिस दिन नियोजित निष्पादन तिथि की घोषणा की जाएगी, उसी दिन से विलम्ब और लागत में वृद्धि शुरू हो जाएगी। यदि अंतिम तिथियों को पूरा करने के लिए DOE पैसे बचाने की कोशिश करेगा, तो भीषण तबाही हो सकती है। अन्यथा इस बात की संभावना नहीं है कि यह घटना 2024 या उसके बाद नए प्रशासन के कार्यभार संभालने से पहले संभव हो पाएगी।

1997 में, अनुभवी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और भूविज्ञानियों की टीम के रहते हमें हमेशा महसूस होता था कि 24-36 महीने का समय आशावादी है। और इसमें हम सार्वजनिक विरोध के उस पैमाने पर विचार तक नहीं कर रहे हैं जो 21वीं सदी में होगा, विशेषकर उटाह के “डाउनवाइंडर्स” के द्वारा जिन्होंने 1963 में परीक्षण के भूमिगत किए जाने से पहले नेवाडा में जमीन के ऊपर किए गए परीक्षण का खामियाजा भुगता था।

नेवाडा परीक्षण स्थल के प्रवेशद्वार पर दो अलग-अलग होल्डिंग पेन हैं। उनका उपयोग 1990 के दशक में परीक्षण-विरोधी प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए किया गया था। 21वीं सदी में इन पेनों का आकार काफी बड़ा करना पड़ेगा और अधिक गार्ड पैट्रोलों की जरूरत पड़ेगी।

यह परीक्षण बहुपक्षीय सहयोग का वाहन भी हो सकता है। ब्रिटेन के ऑस्ट्रेलिया में उनके परीक्षण मैदानों के हाथ से निकलने के बाद अमेरिका ने उसके लिए परीक्षण किए हैं। फ्रांस के साथ करीबी सहयोग है। इजरायली वैज्ञानिकों को उनकी किसी डिवाइस का परीक्षण करने या किसी अमेरिकी परीक्षण में भाग लेने के लिए आमंत्रित करना अमेरिकी विदेश नीति के साथ सुसंगत है, जो कि सर्वविदित है।

परवाह न करने वाले ट्रंप प्रशासन के लिए एक और विकल्प है। वे 1963 की सीमित परीक्षण प्रतिबंध संधि (LTBT) का जानबूझ कर उल्लंघन कर सकते हैं। LTBT वातावरण, महासागरों और बाह्य अंतरिक्ष में परमाणु विस्फोटों को निषिद्ध करती है।

TTBT का उल्लंघन और CTBT का अनौपचारिक पालन करने के लिए तैयार अमेरिकी प्रशासन के लिए, वातावरण में परीक्षण करना एक और छोटी सी धृष्टता हो सकती है। यदि परीक्षण का प्रयोजन शुद्ध रूप से राजनैतिक है तो कैमरों के लिए अत्यंत दृष्टिगोचर होने वाला विस्फोट वास्तव में सकारात्मक होगा। किसी विमान से परमाणु बम गिराना, मिसाइल का परीक्षण या मध्य-प्रशांत सागर में किसी नौका पर विस्फोट अत्यंत दर्शनीय होगा। पर्यावरण संबंधी क्षति सीमित होगी लेकिन इससे सारी दुनिया में सुर्खियाँ बटोरी जा सकेंगी।

परीक्षण चाहे जैसे भी किया जाए, यह प्रभावित करने और धमकाने के लिए परिकल्पित एक राजनैतिक वक्तव्य होगा। यदि यह सचमुच का कोई परीक्षण, जैसे किसी प्रमुख हथियार समस्या को रोकने या किसी नए हथियार को विकसित करने के लिए किया गया प्रयोग है, तो राजनीतिज्ञों को वह सीखने की जरूरत है जो वैज्ञानिक पहले से जानते हैं। 

परीक्षण और प्रयोग कभी-कभी अपेक्षित परिणाम उत्पन्न नहीं करते हैं। उस प्रतिक्रिया की कल्पना करें जो तब होगी यदि अमेरिका ऐसे नौसीखियों द्वारा किए गए परीक्षण के लिए प्रेक्षकों को आमंत्रित करता है जिन्होंने कभी कोई परीक्षण नहीं किया है, और कुछ नहीं होता है! या यदि इससे निकलने वाली ऊर्जा अपेक्षा से अधिक हो गई तो आस-पास के और उससे आगे के भी अमेरिकी राज्यों के ऊपर की हवा में रेडियोधर्मी मलबे के बादल फैल सकते हैं। 

ट्रंप के लिए एक और शर्मनाक स्थिति पैदा हो सकती है। यह घोषणा करने के बाद कि वे परीक्षण करेंगे, उनको पता चलेगा कि इस आदेश का निष्पादन करने में कई वर्ष लगने वाले हैं। इसके साथ ही रूसियों और चीनियों को भी ऐसा ही करने का लाइसेंस मिल जाएगा। वे, अपने वैज्ञानिकों से शीघ्रता से परीक्षण करने की मांग करने में सक्षम होंगे, क्योंकि उन्हें प्रजातंत्रिक और पर्यावरण संबंधी बारीकियों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उस शर्मिंदगी की कल्पना करें जब पुतिन और शी जैसे असफल व्यक्ति खेल में ट्रंप से आगे निकल जाएंगे!

ट्रंप प्रशासन जबसे अस्तित्व में आया है तबसे हथियार नियंत्रण समझौतों को सक्रिय रूप से नकार रहा है। INF, New START और Open Skies को छोड़ने में एक चीज आम है: सार्वजनिक दृष्टि से लघु अवधि में दर्शनीय रूप से कुछ भी नहीं बदलता है। युद्ध के बढ़े हुए जोखिम के साथ निरीक्षणों, आयोग की बैठकों, सहयोगी विनिमयों को समाप्त करना और खर्चों में कमी साधारण जनता को दिखाई नहीं देगी। नजदीकी भविष्य में ऐसा कुछ भी दर्शनीय रूप से नहीं बदलेगा जिस पर जनता का ध्यान जाएगा।

स्वैच्छिक परीक्षण प्रतिबंध को रद्द करना बहुत अलग चीज है। चीजें नाटकीय रूप से बदल जाएंगी। इसके लिए लाखों डॉलरों की व्यवस्था और खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। ऐसे जटिल परीक्षण का प्रयोग करने के लिए जिसे 28 वर्षों से नहीं किया गया है अनेकों नए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को नियुक्त करना पड़ेगा। 

इस परीक्षण का व्यापक रूप से प्रचार करना पड़ेगा ताकि इसका राजनैतिक प्रभाव पड़े, अन्यथा यह किसी काम का नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप विरोधों, मार्चों, परीक्षण स्थल में अतिक्रमणों और गिरफ्तारियों सहित व्यापक प्रतिरोध होगा। यह जनता की नज़र से दूर पुराने दायित्वों को चुपचाप त्याग देने जैसी बात नहीं होगी। यह एक बड़ी, खर्चीली और अत्यंत दर्शनीय ध्रुवीकरण करने वाली घटना होगी।

परमाणु परीक्षण करना एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और इसके निष्पादन में कई रुकावटें आ सकती हैं। जो राजनैतिक नेता इस शक्ति-प्रदर्शन की कसरत का समर्थन कर रहे हैं उन्हें इस बात का कुछ पता नहीं है कि वे किस मुश्किल में फंसने जा रहे हैं। कूटनीति और CTBTO की दुनिया में परीक्षण के विरोध में कई तर्क होंगे। 

उन हथियार नियंत्रण समझौतों को होने वाली क्षति के बारे में वैध आपत्तियाँ उठाई जाएंगी जिन्होंने रीगन और बुश प्रशासनों के द्वारा समझदारी और संयम दर्शाने के बाद से हमें अधिक सुरक्षित किया है। ट्रंप एक बहुत ही फिसलन वाले उतार की यात्रा शुरू करने जा रहे हैं जहाँ वैज्ञानिक लाभ शून्य है और अत्यधिक स्पष्ट विफलता की संभावनाएँ बहुत अधिक हैं।

बेशक, यह स्पष्ट है कि परीक्षण को दोबारा शुरू करने से वह जिन्न बाहर आ जाएगा जिसे पाँच हथियार-युक्त राष्ट्रों के विचारशील और अनुभवी राजनयिकों ने लगभग तीस वर्षों से बोतल में सफलतापूर्वक बंद करके रखा है। परीक्षण को दोबारा शुरू करना खजाने की दृष्टि से एक खर्चीली क्रिया है, परमाणु शांति कायम रखने की दृष्टि से निरर्थक कार्य है और इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रयोग करने लायक परमाणु हथियार युद्ध के सामरिक मैदान में वापस लौट आएंगे। हथियारों के नियंत्रण के लिए एक और दुखद दिन।

*रॉबर्ट केली ने अमेरिकी ऊर्जा परमाणु हथियार संकुल विभाग में, और सबसे हाल में वे लॉस ऐलेमॉस में सहित, 35 से अधिक वर्षों तक काम किया है।उन्होंने 1980 के दशक में सूचना विश्लेषण का काम शुरू करने से पहले अनुसंधान और इंजीनियरिंग में काम किया था।उन्होंने USDOE की ओर से IAEA में भी काम किया जहाँ उन्होंने 1992 में और उसके बाद 2001 में फिर से इराक में परमाणु निरीक्षण निदेशक के रूप में दो बार सेवाएँ प्रदान कीं।आजकल केली वियना में स्थित हैं।उन्होंने 20 से अधिक देशों की पेशेवर यात्रा की है। [IDN-InDepthNews – 14 जुलाई 2020]

फोटो: “ट्रिनिटी” परीक्षण, पहले आणविक परीक्षण, जो 16 जुलाई 1945 को हुआ था, के बाद ग्राउंड ज़ीरो – 6 अगस्त 1945 को अमेरिकी बी-29 बमबारी विमान के द्वारा जापान के हिरोशिमा शहर पर दुनिया का पहला तैनात किया गया परमाणु बम गिराने से चार सप्ताह पहले। सार्वजनिक डोमेन।