Reporting the underreported threat of nuclear weapens and efforts by those striving for a nuclear free world.

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Global Civil Society Demands Bolder Action from NPT States Parties - HINDI

विश्व सिविल सोसाइटी ने एनपीटी में शामिल पक्षकार देशों से साहसिक कदम उठाने की माँग की है

जमशेद बरुआह द्वारा

जीनीवा (IDN) – राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं परमाणु निशःस्त्रीकरण गैर-सरकारी संगठनों के विविधतापूर्ण नेटवर्क ने एक संयुक्त वक्तव्य में सरकार, विशिष्ट रूप से परमाणु-हथियार संपन्न देशों एवं उनके मित्र देशों, के नेताओं से परमाणु हथियारों के खतरों को कम करने और निशःस्त्रीकरण की दिशा में प्रगति को आगे बढ़ाने के पूरे नहीं किए गए वादों को पूरा करने, और “परमाणु हथियारों को संपूर्ण रूप से समाप्त करने” की अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल करने, के लिए अधिक तत्परता के साथ और साथ में मिलकर कार्य करने की गुहार लगाई। यह वक्तव्य 11 मई को परमाणु हथियार अप्रसार संधि (एनपीटी) के अनिश्चित काल के लिए विस्तार की 25वी वर्षगाँठ को जारी किया गया।

इस वर्षगाँठ को COVID-19 विश्वव्यापी महामारी के परिणामस्वरूप स्थगित कर दिया गया है। इस वक्तव्य का समर्थन करने वाले 84 संगठनों के अनुसार, 2020 एनपीटी रिव्यु कॉन्फरेंस का स्थगतिकरण “वर्तमान के सिलसिले को बदलने, कड़वे राजनीतिकरण से ऊपर उठने, और परमाणु हथियारों को समाप्त करने के प्रयासों पर ध्यान केन्द्रित करने का अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है”। उन्होंने एनपीटी के पक्षकार देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस अतिरिक्त समय का बुद्धिमानीपूर्वक उपयोग करने का आह्वान किया है।

यह संयुक्त वक्तव्य एक ऐतिहासिक समय पर जारी किया गया है: वर्ष 2020 में हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका द्वारा परमाणु बम गिराने के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं।

वर्ष 1945 की समाप्ति तक, 210,000 से अधिक लोग—मुख्यतया असैनिक नागरिक—मारे जा चुके थे। किन्तु परमाणु बम से बचने वाले पीड़ित (हिबाकुशा), उनके बच्चे, और पौते-पौतियाँ, परमाणु बम हमले के पीड़ित कोरियाई प्रायद्वीप के लोगों की तरह, अभी भी बम हमले के शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों से ग्रसित हैं।

विकास से लेकर, पारीक्षण और प्रयोग तक, परमाणु हथियारों ने सभी चरणों में लोगों को पीड़ित किया है। मूल निवासी लोग विशेष रूप से परमाणु परीक्षण एवं यूरेनियम के खनन से प्रभावित हुए हैं, और विकिरण न्यूनाधिक रूप से किसी एक लिंग के लोगों को प्रभावित करता है। परमाणु हथियारों के कारण होने वाले नुकसान की कोई राष्ट्रीय सीमा नहीं होती है।

सिविल सोसाइटी इस बात को ज़ोर देकर कहती है कि अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में गिराए गए दो बम आज के मानकों के अनुसार बहुत छोटे और अपरिष्कृत थे। वर्तमान क्षमताएं कहीं अधिक प्राणघातक है। इसके अतिरिक्त, पिछले कई वर्षों में परमाणु हथियारों की संख्या की गिरावट में धीरे-धीरे काफी कमी आई है, जिसका स्थान परमाणु तबाही करने के लिए नई और विविध प्रकार की क्षमताओं को विकसित करने की नई दौड़, जिसके लिए बेहिसाब पूँजी का व्यय किया जा रहा है, ने ले लिया है।

2010 में, एनपीटी के पक्षकार देश सुरक्षा संबंधी रणनीतियों में परमाणु हथियारों की भूमिका को घटाने के लिए सर्वसम्मति से सहमत हुए थे। दस वर्ष बाद इसका विपरीत सत्य है: कि उस भूमिका का विस्तार हो गया है—और यह ना केवल परमाणु हथियार संपन्न देशों द्वारा किया गया है बल्कि उनके इस बुरे काम में साझेदार मित्र देशों—“परमाणु छत्र” देशों—ने भी ऐसा ही किया है।

वे संकेत करते हैं कि नए खतरों ने परमाणु हथियारों को समाप्त करने की ज़रुरत को बढ़ा दिया है। परमाणु हथियारों का आधुनिकरण करने की योजनाओं के साथ साइबर के क्षेत्र में आक्रामक क्षमताओं और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस सहित उभरती हुई तकनीकों ने भी खतरे को बढ़ा दिया है। परमाणु संपन्न देशों और उनके मित्र देशों द्वारा, परमाणु हथियारों संबंधी प्रशिक्षण सहित, युद्ध के खेलों के परिमाण और उनकी गति में वृद्धि की जा रही है। जारी मिसाइल परीक्षण, और परमाणु संपन्न देशों के सैन्य बलों के बीच बार-बार होने वाली नज़दीकी झड़पें परमाणु हथियारों के खतरों में वृद्धि करते हैं।

2017 नोबेल शांति लॉरेट ICAN के अनुसार, 13,865 मुखास्त्र ग्रह के लिए खतरा बने हुए हैं: इनमे से, पाँच – रूस (6,500), अमेरिका (6,185), फ्रांस (300), चीन (290) और ब्रिटेन (200) के पास ये अस्त्र सबसे अधिक संख्या में हैं – और चार पकिस्तान (150-160), भारत (130-140), इज़राइल (80-90) और उत्तर कोरिया (20-30) के पास ये अस्त्र थोड़ी संख्या में हैं। इसके अतिरिक्त, पाँच देश अमेरिका के परमाणु हथियारों को होस्ट कर रहे हैं: इटली (80), तुर्की (50), बेल्जियम (20), जर्मनी (20) और नीदरलैंड्स (20)।

छब्बीस अन्य देश भी, नाटो ऐट्लैन्टिक ट्रीटी आर्गेनाईजेशन (NATO) और कलेक्टिव सिक्यूरिटी ट्रीटी आर्गेनाईजेशन (CSTO) सहित, सुरक्षा गठबंधनों के एक हिस्से के रूप में उनकी ओर से परमाणु हथियारों के संभावित प्रयोग की अनुमति देकर परमाणु हथियारों को अधिकार में रखने और उनका प्रयोग करने हेतु “सहमति” देते हैं।

एक नई जाँच में सामने आया है कि नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों ने 2019 में अपने 13,000 से अधिक परमाणु हथियारों पर $72.9 बिलियन खर्च किया है, इसका तात्पर्य है कि उन्होंने परमाणु हथियारों पर 2019 के हर मिनट में $138,699 खर्च किए। यह 2018 के मुकाबले $7.1 बिलियन की कुल वृद्धि थी।

इसलिए, संयुक्त वक्तव्य परमाणु संपन्न देशों से नए परमाणु हथियारों, नई सुपुर्दगी प्रणालियों, या उनके मुख्य अवयवों का निर्माण करने के लिए तैयार किए गए कार्यक्रमों को रोकने का आह्वान करता है। चेतावनी पर प्रक्षेपित करने की योजनाओं को समाप्त करने वाले नीति निर्णयों के साथ, आधुनिकरण के कार्यक्रमों को बंद करके हम खतरों को कम करना शुरू कर सकते हैं, इसी तरह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीतियों और सिद्धांतों में से परमाणु हथियारों की भूमिका को समाप्त करके खतरों को कम करना शुरू किया जा सकता है।

सिविल सोसाइटी संगठनों का मानना है कि स्वयं हथियारों को समाप्त करके ही परमाणु हथियारों के खतरे का पूर्ण रूप से अंत करना संभव है। वे सभी एनपीटी के पक्षकार देशों से, नई क्षमताओं हेतु किसी भी प्रकार के सहयोग या प्रोत्साहन देने के प्रावधान को रोकने के साथ-साथ, नई परमाणु हथियार क्षमताओं के विकास को रोककर परमाणु हथियारों की दौड़ को रोकने में सहायता करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करने की माँग करते हैं।

इस वक्तव्य का मसौदा रे एचेसन (WILPF); जॉन बरोज़ (लॉयर्स कमिटी ऑन न्यूक्लीयर पालिसी); जैकलिन कबासो (वेस्टर्न स्टेट्स लीगल फाउंडेशन); अकीरा कावासाकी (पीस बोट); डेरिल किमबॉल (आर्म्स कण्ट्रोल असोसिएशन); एलिसन पिटलेक (WILPF); एलिसिया सांडर्स-जैकरे (ICAN); सुसी स्नायडर (PAX); और कार्लोस उमाना (IPPNW)।

संयुक्त वक्तव्य कहता है, “यह परिवेश, सभी देशों से परमाणु हथियारों को समाप्त करके परमाणु हथियारों के खतरे को कम करने का साहसिक कदम उठाने की माँग करता है; एक ऐसा कदम जिसके मूल में ‘परमाणु हथियारों के किसी भी प्रकार के प्रयोग के परिणामस्वरूप मानवता के विनाश की गहरी चिंता है’।”

सिविल सोसाइटी संगठनों ने एनपीटी के पक्षकार देशों के लिए निम्नलिखित तीन संदेश दिए हैं:

  1. एनपीटी को अपार वैश्विक समर्थन प्राप्त है, किन्तुइसकी दीर्घ-कालिक व्यवहारिकता को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

  2. वैश्विक मामलों की गंभीर अवस्था और परमाणु संघर्ष के बढ़ते हुए खतरे और हथियारों की दौड़ का समाधान करने हेतु उत्तरदायी देशों की ओर से नया और साहसिक नेतृत्व प्रदान किए जाने की ज़रुरत है।

  3. जो बदलाव को रोकने का प्रयास करते हैं वे ऐसा भी कहते हैं कि आगे और प्रगति के लिए “परिवेश” सही नहीं है, किन्तु हर स्थान के उत्तरदायी सक्रियक चुनौती का मुकाबला कर रहे हैं।

दुनिया निशःस्त्रीकरण के लिए “सही” परिवेश का निर्माण होने की प्रतीक्षा नहीं कर सकती है। यह सत्य है कि संघर्ष होने से रोकने और उसका समाधान करने, गैर-परमाणु सैन्य क्षमताओं पर नियंत्रण रखने, मानवाधिकारों की रक्षा करने, मौसम और पर्यावरण की रक्षा करने, और अन्य महत्वपूर्ण उद्यमों को करने से सहजतापूर्वक परमाणु निशःस्त्रीकरण करने हेतु सहायता मिल सकती है।

वक्तव्य कहता है कि, किन्तु समझौतों पर विचार-विमर्श करके या एकतरफ़ा कदम उठाकर निशःस्त्रीकरण के लिए कार्य करने से दुनिया की अन्य अत्यावश्यक समस्याओं का समाधान करने के लिए सकारात्मक योगदान देने वाले पारस्परिक रूप से विश्वसनीय माहौल का निर्माण करते हुए परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व की प्राप्ति करने में सहायता प्राप्त होती है। [IDN-InDepthNews – 12 मई 2020]

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